कुछ है मेरे पास तुम्हें बताने के लिए वह सब कुछ मैं तुम्हें सिर्फ बताना नहीं चाहता बल्कि महसूस कराना चाहता हूं. तुमको भी बताने के लिए मुझे बहुत कुछ होता होगा खैर तुम थक गई होगी. क्योकि मैं बेवकूफ हूँ इसलिए तुमने बताना छोड़ दिया कभी कभी आंखो के सामने घटने वाली घटनाएं से बहुत कुछ कहना चाहती हैं अपने दुख सुख बताना चाहती हैं पर हम ही सुनकर भी अनसुना कर देते हैं कभी कभी बेमानी से लगने वाले रास्ते हमें ले जाते हैं खूबसूरत सी मंजिलों की तरफ, जिसके बारे में हम लाख सोच कर भी नहीं सोच सकते सुनो मैं तुम्हारे साथ जीना चाहता हूं उन खूबसूरत पलों को जिनमें वक्त जैसी जल्दबाजी ना हो हर चीज बीत जाने का गम ना हो, उन पलों में केवल हो तो बस ठहराव, खूबसूरत सा आलस भरा फल, जिनमें हम महसूस कर सकें एक दूसरे को तुम्हारे पास आने के लिए मैं कोई बोझिल सी सड़क नहीं लेना चाहता, बल्कि पहुंचना चाहता हूं उन पगडंडियों के सहारे जिनमें कहीं पहुंचने की जल्दबाजी ना हो, जहां हम ठहर सके बिना वक्त का खयाल किए हुए मैं तुमसे कहना जरूर चाहता हूं क्योंकि मैं नहीं चाहता कि हम दोनों में कुछ भी अनकहा रह जाए हां अनसुना होना तुम्हार...
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दर्द
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खुद से लड़ने वाले लोग जंग नहीं जीता करते। वो अपनों से हार जाते हैं। वो जब जंग लड़ते हैं तो इस बात का भी ख्याल रखने लगते हैं कि जिससे वो लड़ रहे हैं उन्हें तकलीफ न हो। खूब है ये तरीका किसी से हारने का भी कि उसकी जीत में न आप हार पाएं न जीत पाएं। बस तड़पते रहें। मुझे खुद से लड़ना बिल्कुल पसन्द नहीं। जब अंदर ही अंदर आप अपने से लड़ के हार रहे होतें है तो दुनिया की किसी भी बात से आपको फ़र्क़ नही पड़ता। नए विश्व युध्द से भी, खुद की मौत से भी नहीं। हमारे पास जब हारने को कुछ नहीं बचता तो हम अपना मन हार जाते हैं। ये स्थिति सबसे खराब होगी है। आपको हँसी नही आती। दुख भी नहीं। रियेक्ट होना बन्द हो जाता है जैसे। माथे पे कोई बोझ सा बैठ जाता है और दिल खाली। मुझे जीने के पैमाने नही पता। पर अब मरने के पैमाने पता चलने लगे हैं। डिप्रेसन बस एक शब्द मात्र लगता है। शायद मैं निर्वात में चला जाता हूँ। आस पास की चीजें सुनाई नही देती। हम्म हम्म बस एक मात्र जवाब होता है। चाहे वो कोई सवाल हो या कोई बात। कुछ समझ ही नही आता। खैर ये वक़्त भी कट ही जाता है। फ़र्क़ बस इतना होता है के वो मरने वाला पैमाना बस इसी समय समझ आता है।...