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उदास शाम

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 एक उदास शाम . . . . . इन उदास शामों का सिलसिला जाने कब खत्म हो और जाने कब एक सुकून जैसा कुछ नजर आए , तुम्हारे ना होने से जिंदगी की गति कम तो नही हुई है पर कभी कभी एक कसक रह जाती है कि तुम होते तो , तो ये दुनिया और भी रंगीन होती .,कुछ और नही बस एक हसरत या तलब जैसा कुछ महसूस हो जाता है .......... पर सबको सब कहा मिलता है ? पर यादें तो सभी को मिलती है , सबके हिस्से में आती है । जैसे जैसे दुनिया चलती है निश्चित तौर पर प्राथमिकताएं बदल जाती है पर जब भी कोई ऐसा मौका आए , जिसमे वक़्त तुम्हारे साथ गुजरा हो तो लगता है कि पुराने घांव को किसी ने कुरेद दिया हो और जो कसक/पीड़ा मन मे उठती है तो लगता है जैसे किसी ने ब्लेड चला दिया हो या कलेजा चीर के रख दिया हो .….............. काश कि कभी ऐसा हो कि किसी खुशनुमा शाम में तुम थोड़ा वक्त निकालकर आओ , और जी भर कर तुमसे बातें कर लूं , कभी रो लूं जी भर के तुम्हारे पास और मन से पूरा गुबार निकल अनन्त में खो जाएं ., कभी तुम मेरे आंसू पोछ लो और मेरे गमों को अपने भीतर सोख लो  ..............    यह बात जानते है कि ऐसा कभी नही होगा पर कभी कभी मन मे ऐ...
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 वह दिन और वो काम अधूरा छोड़कर सबकुछ करता हूं जिन्हें दुनियावाले व्यर्थ समझते हैं।  मैं यह कभी तय नहीं कर पाया कि मुझे फुर्सत के क्षण क्या करना है और मेरी व्यस्तताओं का घटक क्या होगा? मैं असमय, अनिर्धारित ट्रेन की तरह हूं जो चलता जा रही है सबको पासिंग देती बिना किसी डेस्टिनेशन की फिक्र किए। मानो जहां जाकर रुक जायेगी वही उसका गंतव्य होगा।   स्वयं पर नियंत्रण नहीं रहा। मेरे हिस्से एक देह बची है और थोड़ी बहुत सूझ बूझ जिससे इतना तय कर पा रहा हूं कि भूख लगने पर खा लेना चाहिए, प्यास लगने पर पी लेना चाहिए, किसी को रोता देखकर रो लेना चाहिए ; कम से कम दुःखी तो हो ही लेना चाहिए और किसी के बात करने पर बात कर लेना चाहिए।  कुछ लोग हैं जिसने बातें करने की इच्छा बनी रहती है। ऐसा लगता है दिनचर्या का जरूरी हिस्सा हों। इन सबके इतर जीवन को जीने के कई बहाने हैं। जिनमें मैं आप को ज़िंदा पाता हूं। हर सुबह उठते ही मेरे ज़िंदा होने का एहसास होता है और मुझे लगता है कि मेरा होना तमाम निराशाओं, हताशाओं,आशाओं और उम्मीदों का समुच्चय है। जीवन कितना भी नीरस क्यों न लगे, मेरे हिस्से की खुशियां...

बदलाव

 एक उम्र के बाद हम स्थिर हो जाते हैं। नये लोगों से मिलने से बचते हैं। जिस रिश्ते में आप बंधे हैं उन्हें निभाने की हर कोशिश करते हैं। उसके ताने, उसकी दूरियाँ सबकुछ सहते हैं। किन्तु, आप चाहकर भी उससे दूर नहीं होना चाहते।  भावनाओं की कैफ़ियत अलग तरह की होती है। हर बार शुरु से सबकुछ बताते रहना संभव नहीं होता। हर बार ख़ुद को फिर किसी के लिए समर्पित कर पाना बहुत ही कठिन है। हम आदत के शिकार हो जाते हैं। किसी ख़ास इंसान से ख़ास बातें करना हमारी उन आदतों का हिस्सा होता है। लाख जतन के बावजूद हम वो नहीं रह पाते जो हम पहले किसी और के लिए रहे होते हैं।  हम लोगों द्वारा बदले जाते हैं। और यह एक बहुत धीमी चलने वाली प्रक्रिया के तहत होता है; इतनी धीमी कि हमें उस चीज का आभास तक नहीं होता। हम वो हो जाते हैं जो पहले नहीं थे।  किन्तु, कई बार हमारी अपेक्षाओं के विपरीत उन परिस्थितियों से दो चार होना पड़ता है जहाँ हमारी सारी स्थिरता एक कंकड़ की चोट से अस्त व्यस्त हो जाती है। हम अंदर ही अंदर घुटने लगते हैं। हमें हमारा कुछ पता नहीं होता। हम ख़ुद को ढूँढने के लिए बेचैन हो उठते हैं ; और जब ख़ुद...
 कुछ है मेरे पास तुम्हें बताने के लिए वह सब कुछ मैं तुम्हें सिर्फ बताना नहीं चाहता बल्कि महसूस कराना चाहता हूं. तुमको भी बताने के लिए मुझे बहुत कुछ होता होगा खैर तुम थक गई होगी. क्योकि मैं बेवकूफ हूँ इसलिए तुमने बताना छोड़ दिया कभी कभी आंखो के सामने घटने वाली घटनाएं से बहुत कुछ कहना चाहती हैं अपने दुख सुख बताना चाहती हैं पर हम ही सुनकर भी अनसुना कर देते हैं कभी कभी बेमानी से लगने वाले रास्ते हमें ले जाते हैं खूबसूरत सी मंजिलों की तरफ, जिसके बारे में हम लाख सोच कर भी नहीं सोच सकते सुनो मैं तुम्हारे साथ जीना चाहता हूं उन खूबसूरत पलों को जिनमें वक्त जैसी जल्दबाजी ना हो हर चीज बीत जाने का गम ना हो, उन पलों में केवल हो तो बस ठहराव, खूबसूरत सा आलस भरा फल, जिनमें हम महसूस कर सकें एक दूसरे को तुम्हारे पास आने के लिए मैं कोई बोझिल सी सड़क नहीं लेना चाहता, बल्कि पहुंचना चाहता हूं उन पगडंडियों के सहारे जिनमें कहीं पहुंचने की जल्दबाजी ना हो, जहां हम ठहर सके बिना वक्त का खयाल किए हुए मैं तुमसे कहना जरूर चाहता हूं क्योंकि मैं नहीं चाहता कि हम दोनों में कुछ भी अनकहा रह जाए हां अनसुना होना तुम्हार...

दर्द

 खुद से लड़ने वाले लोग जंग नहीं जीता करते। वो अपनों से हार जाते हैं। वो जब जंग लड़ते हैं तो इस बात का भी ख्याल रखने लगते हैं कि जिससे वो लड़ रहे हैं उन्हें तकलीफ न हो। खूब है ये तरीका किसी से हारने का भी कि उसकी जीत में न आप हार पाएं न जीत पाएं। बस तड़पते रहें। मुझे खुद से लड़ना बिल्कुल पसन्द नहीं। जब अंदर ही अंदर आप अपने से लड़ के हार रहे होतें है तो दुनिया की किसी भी बात से आपको फ़र्क़ नही पड़ता। नए विश्व युध्द से भी, खुद की मौत से भी नहीं। हमारे पास जब हारने को कुछ नहीं बचता तो हम अपना मन हार जाते हैं। ये स्थिति सबसे खराब होगी है। आपको हँसी नही आती। दुख भी नहीं। रियेक्ट होना बन्द हो जाता है जैसे। माथे पे कोई बोझ सा बैठ जाता है और दिल खाली। मुझे जीने के पैमाने नही पता। पर अब मरने के पैमाने पता चलने लगे हैं। डिप्रेसन बस एक शब्द मात्र लगता है। शायद मैं निर्वात में चला जाता हूँ। आस पास की चीजें सुनाई नही देती। हम्म हम्म बस एक मात्र जवाब होता है। चाहे वो कोई सवाल हो या कोई बात। कुछ समझ ही नही आता। खैर ये वक़्त भी कट ही जाता है। फ़र्क़ बस इतना होता है के वो मरने वाला पैमाना बस इसी समय समझ आता है।...
 #Dear future wife 😘❤ जब हमारी शादी के लिए एक दिन रह जाएगा न☺ तो मेको ड्रेस दिखाना कि क्या पहनोगी शादी वाले दिन 😍 मैं फिर इमैजिन करके आपको बताऊंगा कि हमारी जोड़ी कैसी लगेगी... 😘 जब मैं जोरों शोरों से आपके घर घोड़ी चढ़ के, सॉरी, घरवाले तो जबरदस्ती कार पर ही बिठाएंगे😏कोई न,जब कार पर बैठ के बारात लेकर आऊंगा😍 और जब मेरी साली साहिबा आपसे  कहेंगी "बाजी, जीजू आ गए"😍 सोच के देखो कित्ती क्यूट स्माइल होगी आपके फेस पर... ☺ जब निकाह के वक़्त एक दूसरे को हम कुबूल करेंगे😍 हाय, सोच के देखो न पगली क्या मूमेंट होगा वो😍 😘 जब हमारे घर मे आपका पहला कदम होगा.. 😍 आपके हाथ मेरे हांथों में होगा... ☺ अब मम्मी जी को तो दिखाना पड़ेगा न कि उनका बेटा बहू ले आया...!!😜 तुम तो कुछ समझती ही नही पगली..😏 हमारे यहां उस दिन, जब आप घर आओगी... 😍 एक रस्म होती है दूध के कटोरे में अंगूठी डाल के उसे खोजने वाली….. 😀 तो बात ये है कि आप उसमे जीतोगी लेकिन आप बिल्कुल डरियो मत अगर मैं बार बार अंगूठी की जगह आपका हाँथ पकड़ूँ... 😜😂 आपके लिए नया घर होगा, नए लोग होंगे पर तुम नर्वस न होना, तुम्हारा ये पगलू 😍 सब कुछ संभ...
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 ज़िंदगी सबको रीप्लेस कर देती है. चाहे आप किसी के कितने भी अज़ीज़ क्यों न हों, एक वक़्त के बाद उस शख़्स के लिए कोई और शख़्स उतना ही अज़ीज़ हो जाता है. आप रिप्लेस हो जाते हैं. जिन हाथों में आपका हाथ हुआ करता था वहाँ किसी और की हथेली आ जाती है. शॉपिंग करते हुए, सड़क पर चलते हुए जो क़दम आपके क़दम से मिल कर चला करते थे, वो साथ में नयी मंज़िल तलाश रहे होते हैं. सब आँखों के सामने बदल रहा होता है और आप नहीं बोलते हैं कुछ, क्योंकि आप बोलना नहीं चाहते हैं. यार, बोल कर या माँग कर जो प्यार मिले वो प्यार नहीं ख़ैरात होता है. धीरे-धीरे आप खुद को दूर कर लेते हैं क्योंकि नज़दीकियाँ वाली दूरियों में घुटन महसूस होने लगती हैं. सब बदल जाता है. बिना तोड़े वादे टूट जाते हैं, बिना बदले रिश्ते बदल जाते हैं, हम ज़िंदा रहते हैं और जीते-जीते कई मौत मरते हैं. ज़िंदगी यही है. ज़िंदा रहना और मर जाना!