उदास शाम
एक उदास शाम . . . . . इन उदास शामों का सिलसिला जाने कब खत्म हो और जाने कब एक सुकून जैसा कुछ नजर आए , तुम्हारे ना होने से जिंदगी की गति कम तो नही हुई है पर कभी कभी एक कसक रह जाती है कि तुम होते तो , तो ये दुनिया और भी रंगीन होती .,कुछ और नही बस एक हसरत या तलब जैसा कुछ महसूस हो जाता है .......... पर सबको सब कहा मिलता है ? पर यादें तो सभी को मिलती है , सबके हिस्से में आती है । जैसे जैसे दुनिया चलती है निश्चित तौर पर प्राथमिकताएं बदल जाती है पर जब भी कोई ऐसा मौका आए , जिसमे वक़्त तुम्हारे साथ गुजरा हो तो लगता है कि पुराने घांव को किसी ने कुरेद दिया हो और जो कसक/पीड़ा मन मे उठती है तो लगता है जैसे किसी ने ब्लेड चला दिया हो या कलेजा चीर के रख दिया हो .….............. काश कि कभी ऐसा हो कि किसी खुशनुमा शाम में तुम थोड़ा वक्त निकालकर आओ , और जी भर कर तुमसे बातें कर लूं , कभी रो लूं जी भर के तुम्हारे पास और मन से पूरा गुबार निकल अनन्त में खो जाएं ., कभी तुम मेरे आंसू पोछ लो और मेरे गमों को अपने भीतर सोख लो .............. यह बात जानते है कि ऐसा कभी नही होगा पर कभी कभी मन मे ऐ...