मैं पुरुष हु....



इस दोगले समाज ने हम पुरुषों को बहुत पीछे कर रखा है महिला सशक्तिकरण के चक्कर मे पुरुष अशक्तिकर्ण हो रहा हर दस्तावेज़,राशन कार्ड,जमीन रजिस्ट्री हर जगह महिला फस्ट कर रखा, और जब इन हरामी नेताओ की रैली/मीटिंग होती तो इनके लिए अपना पुरूष समाज ही अपनी अपनी बाइक पर पिछवाड़ा जलाते हुए इनके मिशन को कामयाब बनाते है जिन्दाबाद के नारे लगाते, दरी बिछाते है, कुर्सी सेट करते, तब महिलाएं कहा चली जाती, तब भी महिलाओं को बुलाओ -----

और सबसे बड़ी चीज पुरूष ही पुरुष का सबसे बड़ा दुश्मन है। आये दिन देखता हूं। फेसबुक पर जब कोई लड़की स्क्रीन शॉट लगा कर किसी लड़के की धज्जियां उड़ा रही होती है तो 50 मनबढ़ चाटूकार, लार चुवावक टाइप के लड़के लड़की की तरफ से लड़के को गाली देते नजर आते, वो भी बिना जाने की आखिर गलती किसकी है----

क्या कहूँ अब इस दोगले समाज के बारे में, जब कोई लड़की घर मे बुटीक खोल कर सिलाई मशीन पर कपड़े सिलती तो वो उनका टैलेंट होता है कला होती है। 

और जब कोई लड़की ब्यूटीपार्लर खोल कर एब्रो सेट करती बाल काटती वो भी उनका टैलेंट होता है कला होती है। ये सब चीजे उसकी शादी के वक़्त उसके मां बाप बड़े फक्र के साथ लड़के वालों को बताते है। मेरी लड़की सिलाई कढ़ाई कर लेती ब्यूटीपार्लर चलाती-----

अभी कोई लड़का घर पे सिलाई मशीन रख कर कपड़े सिलने लगे तो यही  समाज कहेगा अमा  फलाने का छोकरा तो दर्जी है टेलर है। गलती से कही मेंस पार्लर खोल कर एब्रो और बाल काटने लग गया तो आफत ही आ जानी फिर तो लोग यही कहेंगे अरे ढिमाके का लड़का तो नाऊ है  बाल काटता, मने पूरी जिंदगी ऐसे ही मर जाना शादी वियाह तो कभी न होना------

पुरुष! जिसका सामर्थ्य उसकी सैलरी से मापा जाए, जिसकी मुस्कुराहट को अश्लील कहा जाए, जिसके मौन को उसका अपराध कहा जाए, जिसकी नम्रता को उसकी दुर्बलता कहा जाए, जिसके आंसुओ पर हंसा जाए, ये सब सहते हुए भी जो मुस्कुराए, वो पुरुष...!!!


इरफान कुरैशी


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