ज़िंदगी सबको रीप्लेस कर देती है. चाहे आप किसी के कितने भी अज़ीज़ क्यों न हों, एक वक़्त के बाद उस शख़्स के लिए कोई और शख़्स उतना ही अज़ीज़ हो जाता है. आप रिप्लेस हो जाते हैं. जिन हाथों में आपका हाथ हुआ करता था वहाँ किसी और की हथेली आ जाती है. शॉपिंग करते हुए, सड़क पर चलते हुए जो क़दम आपके क़दम से मिल कर चला करते थे, वो साथ में नयी मंज़िल तलाश रहे होते हैं. सब आँखों के सामने बदल रहा होता है और आप नहीं बोलते हैं कुछ, क्योंकि आप बोलना नहीं चाहते हैं. यार, बोल कर या माँग कर जो प्यार मिले वो प्यार नहीं ख़ैरात होता है. धीरे-धीरे आप खुद को दूर कर लेते हैं क्योंकि नज़दीकियाँ वाली दूरियों में घुटन महसूस होने लगती हैं. सब बदल जाता है. बिना तोड़े वादे टूट जाते हैं, बिना बदले रिश्ते बदल जाते हैं, हम ज़िंदा रहते हैं और जीते-जीते कई मौत मरते हैं. ज़िंदगी यही है. ज़िंदा रहना और मर जाना!
तेरी याद में
हर प्रेम को शादी नसीब नहीं होती! शायद हमें भी न हो! लेकिन इसका मतलब ये क़तई नहीं है कि हम दोनो में किसी के प्रेम में कमी है या मन में कोई द्वेष है! वैसे भी शादी के मामले में अब हमारी राय अलग सी ही है! तुम ख़ुद में इंडिपेंडेंट हो शायद और हम तुम्हारे प्रेम में डिपेंडेंट! झगड़े-लड़ाइयाँ, प्यार-मोहब्बत, व्हाट्सप्प की किस्सी-विस्सी सब तुमसे ही तो है! हाँ तुम ही दुनिया की एकमात्र जीवित महिला हो जिसके लिए हम साला सबको किनारे कर के तुम्हारा हाथ थामने को आगे बढ़े रहते हैं! लोग आते हैं! लोग जाते हैं! पर न तुम आइ थी न तुम गयी हो! तुम जबसे हो बस तुम ही हो! एतना, उतना, जितना, कितना न जाने केतना केतना! जेतना भी प्रेम करते हैं बस तुम ही से करते हैं! पहली मुलाक़ात में ही ढेर हो गए थे हम! ऐक्सिडेंट टायिप! बड़ी बड़ी आँखों पे कज़रे की परत! उसपे तिरछि नज़र से हमको देखना! आय हाय हाय हाय हाय! ऐसा लग रहा जैसे आज साल गुज़र गया हो तुमसे पहली मुलाक़ात को!तुम्हारा पागलपन भी देखा है उन्ही कुछ लमहों में! वो सब कुछ जो उस लम्हे मैं छूट गया था शायद अब कभी दोबारा नही मिल पाएगा हमको! हाँ बदल गया है सब! तुम भी ...

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