प्रेम में लड़के

प्रेम में पड़े हुए लड़के डरा नही करते....वो बढ़ा लेते हैं कदम हर उस चीज़ की ओर जो उन्हें सबसे ज्यादा डराया करते हैं....जैसे की फिर से प्रेम में पड़ जाना.....वो भूल जाया करते हैं अपना हर एक पिछला दर्द...अपनी हर एक तकलीफ़....जिसने दी थी कभी ख़ुशी....ताउम्र दुःखों की emi के बदले में....प्रेम में पड़े हुए लड़के नही देखते कभी अपने पुराने घावों को....वो टूटने की हद तक किया करते हैं प्रेम....एक बार फिर....सब कुछ भूल कर कर....सब कुछ दुबारा जी लेने के लिए..मैंने अक्सर ही देखा है कि उन्हें नही पता रहता की दुबारा उनका क्या होगा जब फिर सब कुछ टूटकर अलग हो जाएगा....वो नही सोचते कभी उन महीनों तक निकले हुए एक-एक आंसुओं को....जिन्हें उन्होंने मौत को मात दे देकर जिंदगी के रूप में जीता है
मैंने देखा है प्रेम में पड़े लड़कों को.....जो झूठ बोलते हैं....जो बताते हैं अपनी माँ को कि उन्होनें खाना खा लिया है...और सुबह भी खा कर ही निकलेंगे....पर वो ठीक उसी समय हिसाब किताब बिठा रहे होते हैं मौसम के तापमान कि जो खाना मैंने कल बनाया था..अगर उसे आज नही खा पा रहा हूँ तो क्या वो कल खाने के लिए खराब तो नही होगा ना?....मैंने देखा है प्रेम में पड़े लड़कों को किसी लड़की की तरह रोते हुए....अपना सबकुछ हार कर कर भीख मांगते हुए....प्रेम की खातिर....मैंने देखा है प्रेम में पड़े लड़कों को गलतियां करते हुए....और फिर उसके बाद रोकर माफ़ी मांगने हुए और फिर इस बात पर विश्वास करते हुए भी की रोने से कोई मरा नही करता
मैंने देखा है प्रेम में पड़े हुए लड़कों को पागल होते हुए....हालांकि पागल होना क्या होता है ये आज तक मैं नही समझ नही पाया....

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