पीरियड्स
पीरियड्स महावारी रजस्वला
आखिर क्या है ये बला!!
तुम जो अपनी मर्दानगी पर
इतना इतराते हो
दरअसल बाप तुम
इसी क्रिया से बन पाते हो
कुछ मर्दो को नही है
फिर भी तमीज़
उनके लिए है ये बस
उपहास की चीज़!!
हम 21 वी सदी में जी रहे है
चांद को छू कर उसका
नूर पी रहे है
पर व्हिस्पर आज भी
काली पैकेट में दिया जाता है
जैसे हमें कोई छूत
की बीमारी ऐसे
सबसे अलग कर दिया जाता है
चुपचाप दर्द पीना भी सीखा देते है
किसी को पता ना चले घर मे
ये भी समझा देते हैं!!
भाई पूछता है पूजा क्यों नही की
तो सर झुका कर उसको
समझाना पड़ता है
चाहे दर्द में रोती रहुँ
पर पापा को देखकर
मुस्कुराना पड़ता है
पेट के निचले हिस्से
को जैसे कोई निचोड़ देता है
कमर और जांघ की हड्डियां
जैसे कोई तोड़ देता है
खून की रिसती हर बूंद
के साथ तड़पती हूँ मैं
और जिसे तुमने नाम
दे दिया "क्रेम्पस" का
उसमे सोफे पर निढाल
होकर सिसकती हुँ मैं!!
अब तुम पुरुष कहोगे
की इसमे हमारी क्या गलती
हमारा क्या दोष है???
तो सुनो तुमसे हमारी
ना कोई शिकायत ना
कोई रोष है
बस जब तड़पे दर्द से
तो "मैं हूं ना" ये एहसास
करवा देना
गर्म पानी की बोतल
लाकर तुम दर्द मिटा देना
जो लगे चाय की तलब
तो एक कप चाय बना देना
पैड खत्म हो जाये तो
बिना झुंझलाए ला देना!!
"तो मैं क्या करूँ"कहकर
मुँह मोड़ कर जाना मत
"रेड अलर्ट" "लाल बत्ती"
जैसे शब्दों से चिढाना मत!!
बालो में तेल लगाकर
पीठ को सहलाकर
बस ज़रा सा प्यार जता देना
हम जो धर्म निभाते है
महीने के 27 दिन
तुम सिर्फ 3 दिन ही निभा देना!!!💙
...Irfan.....
...Irfan.....

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