लड़कियों की शादी

शादी भी क्या कमाल कि होती है ना,
साड़ी, सिंदूर, चुड़ी और बिंदी क्या पहनी उम्र की दहलीज ही लांघ जाते हैं। कल तक माँ के साए में रहते थे और एक पल में पराए हो जाते हैं।
ये साडी़ और बिंदी हमे उम्र और समझ में भी सयाना बना जाते हैं। झल्ली सी लड़की को कुशल गृहिणी बना जाते हैं।

किसी भी लड़की के लिए ज़िंदगी की सबसे बड़ी मुश्किल उसकी शादी होती है। एक लड़की जो पिछले बीस बरस से अपने माँ-बाप, भाई-बहनों के साथ रहती है.. उन्हें अचानक एक दिन उनको छोड़कर कहीं और जाना होता है।
हर वक्त डर से भरा रहता है उनका मन..
कैसे होंगे वहाँ के लोग?
कैसे मै रह पाऊँगी..??
क्या सास माँ की तरह मेरी झुंझलाहट बर्दाश्त करेंगी..?
क्या ससुर से मै अपने पिता की तरह कोई ज़िद कर पाऊँगी..?
क्या मेरा देवर मेरे भाई की तरह अपने जेबख़र्च से मेरे लिए समोसे लायेंगें..?
क्या मेरी देवरानी या ननद मेरी बडी़ बहन की तरह मेरी बालो को बांधेंगी ?
मुझे छोटी बहन समझकर हर बात मुझे बताएगी..??
वो सोचती रहती है हर पल.. कि मै जिस घर ब्याहकर जाऊँगी कैसा होगा वो घर?

एक लड़की के लिए सबसे अहम होता है उसका पति.. और उसकी समझ।
लड़की की ख़ुशी पति की समझदारी से होती है।
एक लड़की ता-उम्र तभी ख़ुश रह सकती है जब उसका पति समझदार हो.. जो बातों को समझता हो। जो उसकी ज़रूरतो का ख़याल रखता हो।
पति को भगवान एक लड़की कब कहती हैं..??  वो तब ही भगवान मानती है जब उसमें वो उन तमाम रूपों को देख लेती है जो उसकी ज़िंदगी आसान बना सके। एक लड़की चाहती है उसका पति उसको हिचकी आने पर उसकी माँ की तरह उसके सर पर हाथ रखकर उसे पानी पिलाएं। जब वो किसी गहरी सी सोच में हो या किसी दुविधा में हो तब उसको पिता बनकर उसका दोस्त बन जाए। कभी बहन की तरह मनाए तो कभी भाई बनकर उससे लड़ जाए। मुहब्बत लड़ने और मनाने के दरम्यान ही पनपती है ना । इसलिए लड़कियां एक समझदार पति की ही कामना रखती है।
एक लड़की हमेशा से एक अच्छे घर ब्याहकर जाना चाहती है.. जिसके लिए वो सारे व्रत रखती हैं- सोलह सोमवार करती हैं, केले के पौधे का पूजन करती हैं, उपवास रखती हैं, कान्हा को अपने दिल में बसा लेती हैं और
हर वक़्त भोले शंकर से गुहार लगाती रहती हैं- वो जहाँ जाएं..
शिव उनके साथ जाएं और हमेशा उसे ऐसे ही रखें..
वो शिव के तरह पति की कामना इसलिए करती है क्योंकि शिव और सती के प्यार अटुट होता है। ना शिव सती बिन रह पाते हैं और न सती शिव के बिना।
ठीक वैसे ही वो उसे कभी अकेला ना पड़ने दे.. कभी दुःख ना आने दे। लेकिन एक अच्छा घर लड़की को तभी मिलता है जब वो उसके नसीब में लिखा हुआ हो।
रूपये-पैसे से किसी लड़की का कभी कोई भाग्य निर्धारित नहीं हो सकता। किस्मत से ही मिलता है एक लड़की को एक अच्छा लड़का.. बाक़ी रिश्ते तैयार करने वाले क्या समझ पायेंगे कि उसके लिए तो उसके शिव ने नजाने कबसे रिश्ता तैयार करके रखा है.. वो बस सही वक़्त पर उसके नसीब में वो लिख देगा। इसलिए शादी एक अहम् फैसला है, इसे युँही ना किसी के साथ बांधा जा सकता है।
एक पिता अपनी बेटी को ब्याहने के लिए अपनी पूरे उम्र भर कमाई और तो और अपने घर द्वार भी बेच देते हैं।
ताकी बेटी खुश रहें..!!!

Irfan

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